बुलंद भारत की बुलंद तस्वीर, लोकतंत्र के नए ‘मंदिर’ का शुभारंभ

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”Long years ago we made a tryst with destiny, and now the time comes …” वायसराय लॉज से पंडित नेहरू ने अपने भाषण की शुरूआत करते हुए कहा था- कई साल पहले हमने भाग्य को बदलने का प्रयास किया था और अब वो समय आ गया है जब हम अपनी प्रतिज्ञा से मुक्त हो जाएंगे। 14-15 अगस्त की आधी रात को जब आधी दुनिया सो रही थी तो हिन्दुस्तान अपनी नियती से मिलन कर रहा था। भारत से ब्रिटिश राज चला गया लेकिन राजपथ नहीं गया। पिछले 73 वर्षों से लोकतंत्र के मंदिर संसद से भारत का शासन चलता आया है। आजादी के पहले से ही अंग्रेजों के जमाने में मौजूदा संसद भवन का निर्माण हुआ था। अंग्रेजों के जमाने में बना भारत का संसद भवन अब सिर्फ इतिहास में रह जाएगा। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज नए संसद भवन की आधारशीला रखी। पीएम मोदी ने मंत्रोच्चारण के बीच नए संसद भवन का भूमि पूजन किया। इस दौरान सर्वधर्म प्रार्थना भी की गई और हिन्दू, सिख, ईसाई, मुस्लिम, बौद्ध, जैन एवं अन्य धर्मों के धर्मगुरु भी मौजूद रहे।
पीएम मोदी द्वारा नए संसद भवन की शिलान्यास भूमि पूजन के बाद लोकसभा के अध्यक्ष ओम बिरला ने भूमि पूजन सामग्री अर्पित की। टाटा ट्रस्ट के अध्यक्ष रतन टाटा, केंद्रीय मंत्री एचएस पुरी, राज्यसभा के उप सभापति हरिवंश, अमित शाह, राजनाथ सिंह और अन्य कई केंद्रीय मंत्री कार्यक्रम स्थल पर मौजूद हैं।

नए संसद भवन में क्या होगा खास
चार मंजिला नए संसद भवन का निर्माण 971 करोड रुपए की अनुमानित लागत से 64500 वर्ग मीटर क्षेत्रफल में किए जाने का प्रस्ताव है। इसका निर्माण कार्य भारत कीस्वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ तक पूरा कर लिया जाएगा। प्रत्येक संसद सदस्य को पुनःनिर्मित श्रम शक्ति भवन में कार्यालय के लिए 40 वर्ग मीटर स्थान उपलब्ध कराया जाएगा जिसका निर्माण 2024 तक पूरा किया जाएगा। नए संसद भवन के निर्माण का प्रस्ताव उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू एवं लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने क्रमशः राज्यसभा और लोक सभा में 5 अगस्त 2019 को किया था। लोकसभा कक्ष में 888 सदस्यों के बैठने की व्यवस्था होगी, जिसमें संयुक्त सत्र के दौरान 1224 सदस्यों के बैठने की व्यवस्था भी होगी। इसी प्रकार, राज्य सभा कक्ष में 384 सदस्यों के बैठने की व्यवस्था होगी।

आकाश भगत

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