घर गिरवी रख हादसे में घायल इकलौते बेटे का इलाज कराया; 20 दिनों तक होश नहीं आया, मौत

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रामगढ़ में 20 दिन पहले सड़क दुर्घटना में बुरी तरह घायल गांडेय के युवक अनिल चौधरी की शुक्रवार को इलाज मौत हो गयी। अपने इकलौते बेटे के इलाज के लिए पिता ने घर तक गिरवी रख दिया, लेकिन बेटे की जान नहीं बचा सके। युवक गांडेय थाना क्षेत्र के डेवनडीह का रहनेवाला था। हादसे में घायल होने के बाद से ही बेहोश था। रामगढ़, रिम्स, गांडेय के बाद धनबाद में इलाज कराने के बाद भी उसकी हालत में कोई सुधार नहीं हुआ।

आखिरकार शुक्रवार को उसकी मौत हो गई। डॉक्टरों के अनुसार, उसके सिर में गंभीर अंदरुनी चोटें आईं थीं। पिता मोहन चौधरी बताते हैं कि उन्होंने अपनी खराब आर्थिक स्थिति के बावजूद बेटे के इलाज में कोई कसर नहीं छोड़ी। घर को गिरवी रखकर इलाज कराया, लेकिन बेटे को बचा न सका। अब मैं किसके सहारे जिऊंगा।

जानकारी के अनुसार गांडेय थाना क्षेत्र के डेवनडीह निवासी मोहन चौधरी का 20 साल का इकलौता बेटा अनिल चौधरी रामगढ़ में एक होटल में काम करता था। 20 दिन पहले सड़क हादसे में वह बुरी तरह घायल हो गया। उसे एक फोर व्हीलर ने धक्का मार दिया था, जिससे वह बेहोश होकर सड़क पर गिर गया। रामगढ़ में ही प्राथमिक उपचार के बाद उसे बेहोशी की हालत में रिम्स, रांची में भर्ती कराया गया था, लेकिन होश नहीं आया। दिन प्रति दिन उसकी हालत बिगड़ती ही गई।

पिता ने बताया कि गरीबी और आर्थिक स्थिति खराब होने कारण वे रिम्स में इलाज नहीं करा सके, क्योंकि उनके पास रांची में रह कर इलाज कराने और महंगी दवाओं के लिए पैसे नहीं थे। जब होश नहीं आया, तो वे बेटे को उसी हालत में गिरिडीह ले आए। गिरिडीह लौटने के बाद बेटे की जिंदगी बचाने और पैसों के जुगाड़ के लिए उन्होंने घर को गिरवी रख दिया। बेहोशी की हालत में घायल बेटे को विश्वनाथ नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया, लेकिन वहां भी हालत में कोई सुधार नहीं हुआ।

बेटे की गंभीर स्थिति को देखते हुए नर्सिंग होम के डॉक्टरों ने उसे पीएमसीएच, धनबाद रेफर कर दिया। इसके बाद वे बेहोशी की हालत में ही बेटे को लेकर धनबाद पहुंचे और इलाज शुरू कराया, पर उसकी मौत हो गयी।

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