नीना गुप्ता की ‘द लास्ट कलर’ दिखाती है आदमी के बिना कितनी बेबस होती है औरत की जिंदगी!

0
कहने के लिए बदलते वक्त के साथ महिलाओं की समाजिक स्थिति में बदलाव हुआ है लेकिन जमीनी स्तर पर देखा जाए तो अभी भी कुछ ऐसे रीति रिवाज है जिन्होंने औरतों को जकड़ कर रखा हुआ है। अभी भी सामाज में एक औरत की पहचान बिना आदमी के पूरी नहीं होती है, भले ही वो आसमान छू कर क्यों न आ जाए!
कोई लड़की शादी नहीं करना चाहती और कुछ बनना चाहती है तो उसे ये समाज बिना आदमी के आने वाली समस्याओं से डराता है। अगर किसी औरत का पति दुनिया से पत्नी ने पहले चला जाए तो औरत के पैर में विधवा नाम की बेड़िया बांध दी जाती है और औरत का श्रंगार हमेशा के लिए छीन लिया जाता है। आदमियों पर समाज ऐसे कोई नियम नहीं लगाता।
  • फिल्म रिव्यू
महिलाओं की समाजिक स्थिति पर बॉलीवुड से लेकर हॉलीवुड तक कई फिल्में बन चुकी हैं, जिसमें महिलाओं पर थौपे गये बहुत से सामाजिक नियमों से पर्दा उठाया गया है और औरत के दर्द को दुनिया को दिखाया गया है। एक ऐसी ही फिल्म है ‘द लास्ट कलर’। ये फिल्म में उन विधवा महिलाओं के जीवन संघर्ष को दर्शाती है, जो कि अपनी इच्छाओं और खुशियों को परे रखकर वृंदावन और वाराणसी जैसी जगहों पर रहती हैं और पति के जिंदगी मे न होने की सजा भोगती हैं। इसके अलावा ये फिल्म समाज में फैले जातिवाद पर भी गहरा प्रहार करती है।

 

फिल्म ‘द लास्ट कलर’ की काफी चर्चा है। बॉलीवुड एक्ट्रेस नीना गुप्ता की फिल्म द लास्ट कलर ऑस्कर के लिए क्वालीफाई कर चुकी है। इस बात की जानकारी नीना गुप्ता और फिल्म के डायरेक्टर विकास खन्ना ने खुद अपने ट्विटर पर शेयर की। हाल ही में इस फिल्म ने मुंबई फिल्म फेस्टिवल में भी काफी तारीफें बटोरी थीं। द लास्ट कलर का पहला पोस्टर कान्स इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में जारी किया गया था। तब से ही भारत में फिल्म की रिलीज़ का इंतज़ार हो रहा था। फिल्म ने इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल सर्किट में काफी नाम कमा लिया है। द लास्ट कलर ने बोस्टन इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में बेस्ट फीचर फिल्म और नीना गुप्ता ने बेस्ट एक्ट्रेस का अवार्ड भी जीता। अब ये फिल्म आप भारत में भी देख सकते हैं। फिल्म को ओटीटी अमेजन प्राइम पर रिलीज किया गया है।
  • कहानी
कहानी की बात करे तो की फिल्म ‘द लास्ट कलर’ की कहानी में चार किरदार- नूर, अनारकली, छोटी और चीकू मुख्य है। विलेन का नाम राजा है जो महिलाओं पर केवल अत्याचार करने के लिए ही जन्म लेता है। नूर यानी की नीना गुप्ता एक विधवा के किरदार में नजर आ रही हैं जिन्होंने अपने सारे सुखों को विधवा धर्म निभाने के लिए त्याग दिया है। वह एक सफेद साड़ी में बनारस के घाट पर दिन और एक आश्रम में अपनी रात गुजार रही हैं।
एक दिन नूर की मुलाकात घाट पर छोटी से होती है। छोटी एक अनाथ लड़की है जो रस्सी पर चल कर कुछ पैसे कमा लेती है। नीच जात की होने के कारण लोग छोटी से बहुत ही बत्तमीजी से बात करते हैं और घाट की लड़की कहते हैं। नूर को छोटी की मासूम बाते बहुत अच्छी लगती है। नूर और छोटी साथ में काफी वक्त बिताने लगते हैं लेकिन एक दिन राजा आता है और वह छोटी की दोस्त अनारकली जो एक ट्रांसजेंडर है, उसे मार डालता है। अनारकली को मारते हुए राजा को छोटी को देख लेती है अब राजा छोटी के पीछे पड़ जाता है। आगे की स्टोरी आपको सोचने पर मजबूर कर देगी।
फिल्म के सभी किरदारों ने बहुत ही शानदार काम किया है। नीना गुप्ता एक बहुत ही शानदार एक्ट्रेस हैं उन्होंने पर्दे पर अपने किरदार में जान डाल दी हैं। ऑस्कर जीतने की रेस में दौड़ रही विकास खन्ना की ये फिल्म एक आइना है।
आकाश भगत

About Author

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed