Mithun Sankranti 2026: Mithun Sankranti का महापुण्य काल आज, जानें Lucky Time और सूर्य पूजा का Special महत्व

आज यानी की 15 जून को मिथुन संक्रांति मनाई जा रही है। यह संक्रांति उस समय होती है, जब ग्रहों के राजा सूर्य देव मिथुन राशि में प्रवेश करते हैं। इस क्षण को संक्रांति कहा जाता है। मिथुन संक्रांति के मौके पर महापुण्य काल में लोग पवित्र नदियों में स्नान करते हैं। फिर इस दिन दान-पुण्य करने का विशेष महत्व होता है। वहीं इस दिन सूर्य देव की पूजा-अर्चना के लिए बेहद खास होता है। तो आइए जानते हैं इसकी तिथि, महत्व, पूजन विधि के बारे में…

तिथि और मुहूर्त

वैदिक पंचांग के मुताबिक 15 जून को दोपहर 12:59 मिनट पर सूर्य देव मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे। इस दौरान सूर्य की मिथुन संक्रांति होगी। सूर्य देव के मिथुन राशि में प्रवेश करने से इसका प्रभाव सभी 12 राशियों पर होता है।

महापुण्य काल

मिथुन संक्रांति पर महा पुण्य काल दोपहर में 12:59 मिनट पर शुरू होगा। यह महापुण्य काल दोपहर 03:19 मिनट तक रहेगा। मिथुन संक्रांति के महापुण्यकाल की अवधि 2 घंटे 20 मिनट तक रहेगा। मिथुन संक्रांति का पुण्य काल 6 घंटे 21 मिनट का होगा।

दान-पुण्य

मिथुन संक्रांति के दिन स्नान आदि के बाद अन्न, जल, वस्त्र, फल और गुड़ आदि का दान करना चाहिए। इससे सूर्य ग्रह मजबूत होता है और जातक का अपने पिता के साथ संबंध मजबूत होता है। साथ ही नौकरी में तरक्की के योग बनते हैं। 

पूजन विधि

इस दिन सुबह किसी पवित्र नदी में स्नान करें। अगर नदी में स्नान करना संभव नहीं है, तो घर पर नहाने के पानी में गंगाजल डालकर स्नान करना चाहिए। फिर सूर्य देव का ध्यान करें और उनको अर्घ्य दें। इस दिन सूर्य देव के मंत्रों का जाप करें और पितरों का ध्यान किया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करना भी शुभ माना जाता है।

उपाय

लाल रंग का आकर्षण

बता दें कि सूर्य देव को लाल रंग बेहद प्रिय है। पूजा के समय सूर्य देव को लाल वस्त्र और लाल फूल चढ़ाएं। वहीं इस दिन खुद भी लाल रंग के कपड़े पहनने चाहिए और चंदन का तिलक लगाएं। इससे व्यक्ति का आत्मविश्वास बढ़ेगा।

आदित्य हृदय स्तोत्र

अगर कोई व्यक्ति जीवन में बार-बार असफल हो रहे हैं, तो संक्रांति के दिन आदित्य हृदय स्त्रोत का पाठ करना चाहिए। यह सूर्य देव को प्रसन्न करने का सबसे शक्तिशाली तरीका है। आदित्य हृदय स्त्रोत का पाठ करने से आत्मबल और तरक्की को बढ़ती है।

प्रकृति की सेवा करें

रविवार के दिन पीपल के वृक्ष को जल अर्पित करना चाहिए और पेड़ की परिक्रमा करनी चाहिए। वहीं घर में तुलसी के पौधे की सेवा करनी चाहिए। तुलसी सेवा से सूर्य देव भी प्रसन्न होते हैं और उत्तम स्वास्थ्य का वरदान मिलता है।