Barsana की Lathmar Holi का अनोखा Secret, क्यों महिलाएं देसी घी खाकर पुरुषों पर बरसाती हैं लाठियां?
होली का त्योहार उत्साह और रंगों के लिए जाना जाता है। विश्वभर में ब्रज की होली सबसे ज्यादा लोकप्रिय है। ब्रज की लट्ठमार होली, फूलों की होली और लड्डओं की होली काफी फेमस है। बरसाना की लट्ठमार होली उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में मनाई जाने वाली पारंपरिक होली है, यह होली राधा रानी और भगवान कृष्ण के प्रेम और उनकी लीलाओं पर आधारित है। और यह होली का गाना सबको जरुर पसंद आएगा।
होरी खेले तो आ जइयो,
बरसाने रसिया
रंग भी लइयो गुलाल भी लइयो,
गोपी भी लइयो संग ग्वाल भी लइयो,
मन मिले तो आ जइयो,
बरसाने रसिया
फाल्गुन मास में बरसाना की रंगीली गली में होने वाले इस उत्सव में नंदगांव के पुरुष (हुरियारे)बरसाना की महिलाओं (हुरियारिनों) पर रंग डालते हैं और बदले में महिलाएं उन्हें हंसी-मजाक में लाठियों (लठा) से पीटती हैं,जिससे पुरुष अपनी ढाल से बचते हैं। बृज में कहते हैं न-
या होरी को का कोऊ जाने
होरी को रस रसिक ही जाने
मन में सदा के लिए अंकित
कब से शुरू होगी लठामार होली
इस साल 26 फरवरी को बरसाना की नारियां नंद गांव के होरियारों के साथ लठमार होली खेलेंगी। बरसाने की इस अनोखी परंपरा को सही रूप में समझने के लिए राधा रानी के प्रति गहरी श्रद्धा और प्रेम को हृदय में स्थान देना आवश्यक है। बरसाना में राधा रानी, जिन्हें स्नेहपूर्वक ‘लाड़ली जी’ कहा जाता है जो कि विशेष और सर्वोपरि महत्व है, क्योंकि यही उनकी जन्मभूमि और उनकी दिव्य लीलाओं की पावन धरती मानी जाती है।
फाल्गुन में भीगती प्रेम की डोर
गौरतलब है कि बरसाना की लठमार होली विश्वप्रसिद्ध है। बरसाना और नंदगांव के बीच प्रेम में सरोबार ऐसी डोर है जो हर फागुन में रसरगं में भीजती है और अपने भक्तों को उसी प्रेम में भिगोती है। शिवरात्रि के दिन से ही लाडली जी महल से ढप, मृदंग और झांझ की थाप पर ब्रजवासी भक्ति और प्रेम में डूबे हुए नाचते-गाते होली की गुहार लगाने लगते हैं।
होरी है भई होरी है,होरी है भई होरी है
लठामार बरसाना खेलूं राधा रानी से मैं बोलूं
लाया हूं नंद का लाल रसिया होरी में,
सुनले ओ नंद के लाल रसिया होरी में,
लाल गुलाल लगा दूं तोपे, फिर मैं बोलूं सीधे मुंह से
मैं तो मारूं पिचकारी धार रसिया होरी में
नारी बनाई नचाई छोड़िहों
होली खेलने का विशेष आमंत्रण भेजा जाता है
नंदगांव के पुरुषों को बरसाना की महिलाओं द्वारा होली खेलने के लिए न्योता भेजा जाता है। वहीं, टेसू और पलाश के फूलों से बने रंगों से होली खेली जाती है। कहा जाता है कि फागुन में नंदगांव से होरियारों की ओर से बरसाना की होरियारिनों के लिए देसी घी भेजा जाता है जिससे वे ताकत से उन पर लाठी बरसा सकें।
