Jyeshtha Purnima 2025: ज्येष्ठ पूर्णिमा पर स्नान-दान का होता है विशेष महत्व, जानिए पूजन विधि और मुहूर्त

हर महीने की आखिरी तिथि को पूर्णिमा तिथि के रूप में मनाई जाती है। हिंदू धर्म में पूर्णिमा तिथि का विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन जगत के पालनहार भगवान श्रीहरि विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा करने का विधान है। वहीं इस दिन स्नान-दान का भी विशेष महत्व माना जाता है। इससे व्यक्ति के जीवन में खुशियों का आगमन होता है। पूर्णिमा के दिन गंगा नदी में स्नान करना चाहिए, इससे जातक की सभी मनोकामनाएं पूरी होती है। वहीं व्रत और दान करने से पितरों का भी आशीर्वाद प्राप्त होता है। तो आइए जानते हैं पूर्णिमा तिथि का मुहूर्त, पूजन विधि और महत्व के बारे में…

तिथि और शुभ मुहूर्त
बता दें कि 10 जून की सुबह 08:05 मिनट पर ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा तिथि की शुरुआत हो चुकी है। वहीं आज यानी की 11 जून की सुबह 09:43 मिनट पर इस तिथि की समाप्ति होगी। ऐसे में आज रात 10:50 मिनट पर पूर्णिमा का चांद निकलेगा। वहीं आज सुबह 04:02 मिनट से लेकर 04:42 मिनट तक स्नान-दान का मुहूर्त है। 
स्नान-दान और पूजन विधि
इस दिन सुबह जल्दी स्नान आदि कर व्रत का संकल्प लें। इसके बाद सूर्य देव को अर्घ्य दें और इस दिन विशेष रूप से सफेद वस्त्र पहनें। इसके बाद मंत्र जाप करते हुए सफेद वस्तुओं और जल का दान करें। वहीं रात में चंद्रदेव को अर्घ्य जरूर दें। आप इस दिन फलाहार या जल पीकर व्रत कर सकते हैं।
महत्व
पूर्णिमा तिथि को पूर्णता का प्रतीक माना जाता है। पूर्णिमा तिथि पर चंद्रमा अपनी पूर्ण अवस्था में होता है। हिंदू पंचांग के मुताबिक ज्येष्ठ माह वर्ष का तीसरा महीना होता है। वहीं इस दिन व्रत और दान-पुण्य करने से जातक को अक्षय पुण्य फल की प्राप्ति होती है। वहीं पूर्णिमा पर चंद्रमा की विधिविधान से पूजा करने से चंद्र संबंधी दोष भी दूर होते हैं।

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