Vishwakarma Jayanti पर अष्टदल रंगोली और सात अनाजों से करें मशीनों व औजारों की पूजा

हिंदू धर्म में भगवान विश्वकर्मा को वास्तुकला, निर्माण, शिल्प और तकनीकी कौशल से जुड़ा देवता माना जाता है। इस पर्व का विशेष महत्व होता है। खासतौर पर यह पर्व इंजीनियरों, कारीगरों, फैक्ट्री कर्मचारियों, मेकैनिक, व्यापारियों, बिल्डरों और मशीनों व उपकरणों के साथ काम करने वाले लोगों के लिए अहम होता है। इस बार आज यानी की 17 सितंबर को विश्वकर्मा जयंती मनाई जा रही है। इस दिन लोग मशीनों और औजारों की पूजा करते हैं और भगवान विश्वक्रमा से काम में सफलता, तरक्की और सुरक्षा आदि की कामना करते हैं। तो आइए जानते हैं विश्वकर्मा जयंती की तिथि, मुहूर्त, पूजन विधि और महत्व आदि के बारे में…

तिथि और मुहूर्त

इस बार 17 सितंबर 2026 को विश्वकर्मा पूजा मनाई जाएगी। यह पर्व कन्या संक्रांति के दिन मनाया जाता है, जब सूर्य देव सिंह राशि से निकलकर कन्या राशि में गोचर करेंगे। इस बार कन्या संक्रांति का समय सुबह करीब 07:58 मिनट माना गया है।

पूजन विधि

इस दिन सुबह जल्दी स्नान आदि करने के बाद साफ कपड़े पहनें। इसके बाद ऑफिस, कार्यस्थल, कारखाने, मशीने और औजारों को अच्छे से साफ कर लें। फिर चारों ओर गंगाजल से छिड़काव करे। अब अष्टदल रंगोली बनाएं और उस पर सात तरह के अनाजों को रखें। फिर भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा को स्थापित करें और मशीनों व उपकरणों पर फूल, तिलक और कलावा आदि अर्पित करें। अब धूप-दीप जलाकर पूजा करें और अंत में भगवान विश्वकर्मा की आरती करें।

महत्व

धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक भगवान विश्वकर्मा को देवताओं के दिव्य निर्माणकर्ता के रूप में जाना जाता है। भगवान विश्वकर्मा ने देवताओं के लिए कई भव्य और दिव्य भवनों और नगरों का निर्माण किया है। इस कारण भगवान विश्वकर्मा को निर्माण, सृजन और शिल्पकला का देवता माना जाता है।

मंत्र

ॐ विश्वकर्मणे नमः