Kalki Jayanti 2026: कलयुग के अंत और Sat-Yuga की स्थापना का प्रतीक, जानें शुभ Muhurat और पूजन विधि
हर साल सावन माह की शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को कल्कि जयंती मनाई जाती है। इस बार आज यानी की 18 अगस्त 2026 को कल्कि जयंती मनाई जा रही है। धार्मिक मान्यता है कि कलियुग के अंत में जब अधर्म अपने चरम पर होगा, तब धर्म की स्थापना के लिए भगवान विष्णु अपना 10वां और अंतिम कल्कि अवतार लेंगे। मान्यता है कि इसी पावन तिथि पर भगवान कल्कि का प्राकट्य होगा। तो आइए जानते हैं कल्कि जयंती की तिथि, मुहूर्त, पूजन विधि और महत्व के बारे में…
तिथि और मुहूर्त
वैदिक पंचांग के मुताबिक 17 अगस्त की शाम 05:00 बजे से सावन माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि की शुरूआत होगी। वहीं आज यानी की 18 अगस्त की शाम 05:50 मिनट पर इस तिथि की समाप्ति होगी। ऐसे में उदयातिथि के हिसाब से 18 अगस्त 2026 को कल्कि जयंती मनाई जाएगी। वहीं इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त दोपहर 04:31 बजे से शाम 05:50 बजे तक है।
पौराणिक मान्यताएं
पौराणिक ग्रंथों जैसे अग्निपुराण, श्रीमद्भागवत महापुराण, कल्कि पुराण, वायुपुराण के मुताबिक कलियुग के अंतिम चरण में ‘शंभल’ नामक जगह पर विष्णुयश नामक तपस्वी ब्राह्मण के घर भगवान कल्कि का अवतरण होगा। वह देवदत्त नामक श्वेत घोड़े पर सवार होकर आएंगे। भगवान कल्कि पापियों और अधर्मियों का संहार करेंगे और फिर से सतयुग की स्थापना करेंगे। सिर्फ हिंदू धर्मग्रंथों में ही नहीं बल्कि सिख और बौद्ध धर्म में भी भगवान कल्कि के अवतार का वर्णन मिलता है।
पूजन विधि
कल्कि जयंती के दिन भगवान श्रीहरि के मंदिरों में विशेष अनुष्ठान होते हैं। वहीं भक्त इस दिन व्रत भी करते हैं। इस दिन सुबह जल्दी स्नान आदि करने के बाद साफ कपड़े पहनें। फिर भगवान विष्णु का ध्यान करें और लकड़ी की चौकी पर लाल या पील कपड़ा बिछाएं। इस पर भगवान विष्णु या भगवान कल्कि के मूर्ति को स्थापित करें। इसके बाद भगवान विष्णु को चंदन, कुमकुम और हल्दी का तिलक करें।
फिर ताजे फूल अर्पित करें और धूप-दीप, नैवेद्य अर्पित करें और तुलसी दल नैवेद्य में जरूर रखें। पूजा के अंत में आरती करें। इस दिन विष्णु सहस्त्रनाम और या कल्किपुराण का पाठ करें। साथ ही विष्णु मंत्रों का जाप करें। पूजा खत्म करने के बाद क्षमायाचना करें।
