क्या लक्कुंडी गांव में मिलेगा सोने का भंडार? 400 साल पुराने खजाने के रहस्य ने सबके उड़ाए होश

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कर्नाटक के गडग जिले में एक मकान बनाने के दौरान खुदाई में सोने के सदियों पुराने आभूषण मिलने से सनसनी फैल गई है। इसके बाद राज्य सरकार पूरे लक्कुंडी गांव के निवासियों को दूसरी जगह बसाने पर विचार कर सकती है। सरकार ने लक्कुंडी में कोटे वीरभद्रेश्वर मंदिर के परिसर में पूर्ण रूप से खुदाई शुरू करने का निर्णय लिया है। यह पूरी मुहिम पर्यटन विभाग, पुरातत्व, संग्रहालय एवं विरासत विभाग, लक्कुंडी धरोहर विकास प्राधिकरण और जिला प्रशासन द्वारा संयुक्त रूप से संचालित की जा रही है।

 

 

 

हीरे, मोती, माणिक्य और मूंगे सहित कई रत्न

मीडिया खबरों के मुताबिक खजाने की तलाश उस वक्त शुरू हुई, जब एक लड़के को तांबे का एक छोटा सा बर्तन मिला, जिसमें सोने के 470 ग्राम वजनी आभूषण थे। बताया जाता है कि ये आभूषण 300 से 400 वर्ष पुराने हैं। लड़के ने यह आभूषण जिला प्रशासन को सौंप दिये, जिसके लिए उसे सम्मानित किया गया। मीडिया खबरों के मुताबिक यह क्षेत्र सोने, चांदी, हीरे, मोती, माणिक्य और मूंगे सहित बहुमूल्य खनिजों से समृद्ध माना जाता है।  लक्कुंडी पर चालुक्य, राष्ट्रकूट, होयसल, कलचुरी और विजयनगर शासकों का शासन रहा है और इसका संबंध प्रसिद्ध दानवीर दानचिंतामणि अत्तिमब्बे से भी रहा है।

 

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गांववावों को करेंगे शिफ्ट

लक्कुंडी में खजाने की तलाश में राज्य सरकार के खुदाई शुरू करने के बीच, गडग के उपायुक्त सी एन श्रीधर ने मीडिया से कहा कि ग्रामीणों को दूसरी जगह बसाने का निर्णय खुदाई के निष्कर्षों पर निर्भर करेगा। उन्होंने मीडिया से कहा कि खुदाई के निष्कर्षों के आधार पर ग्रामीणों को दूसरी जगह बसाने का निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि ऐसी स्थिति उत्पन्न होती है, तो निर्णय राज्य सरकार के स्तर पर लिया जाएगा।

 

खुदाई से जुड़े सूत्रों ने कहा कि लक्कुंडी ऐतिहासिक रूप से एक समृद्ध केंद्र रहा है और उपलब्ध साक्ष्य संकेत देते हैं कि यहां अब भी भूमिगत अपार भौतिक संपदा हो सकती है।  नवंबर 2024 में की गई एक खोज के दौरान लक्कुंडी में हजारों प्राचीन कलाकृतियां मिली थीं। हाल में आभूषणों की खोज से इस स्थल के प्रति रुचि और बढ़ गई है। अधिकारियों के अनुसार, अब भी इलाके के विभिन्न हिस्सों में नीलम, मोती, रत्न, हीरे जैसे कीमती पत्थर मिलने की सूचनाएं प्राप्त होती रहती हैं।

 

 

 

क्या कहते हैं पुरातत्वविद

मीडिया खबरों के मुताबिक पुरातत्वविदों ने कहा कि यह नई खुदाई ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है और इससे कर्नाटक के मध्यकालीन इतिहास से जुड़े अभिलेख, स्मारक, मूर्तियां और आभूषण मिलने की उम्मीद है, जिससे लक्कुंडी की समृद्ध विरासत को समझने में मदद मिलेगी।

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सोने के सिक्के ढालने का प्रमुख केंद्र

पुरातत्व विभाग के सूत्रों के अनुसार, प्राचीन काल में यह स्थान सोने के सिक्के ढालने का प्रमुख केंद्र भी था। मंदिर परिसर में खुदाई के लिए जेसीबी, ट्रक और ट्रैक्टर लगाए गए हैं। अधिकारियों के अनुसार, 10 वर्ग मीटर क्षेत्र को खुदाई के लिए चिह्नित किया गया है और इसे आधिकारिक रूप से खुदाई क्षेत्र घोषित किया गया है। इस काम से जुड़े एक अधिकारी ने कहा कि इस कार्य के लिए 15 महिलाओं और 5 पुरुषों को लगाया गया है।

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