PM मोदी बोले- काशी में की गई थी मेरी मृत्यु की कामना, फिर भी मैं अपने को सौभाग्यशाली समझता हूं

PM मोदी बोले- काशी में की गई थी मेरी मृत्यु की कामना, फिर भी मैं अपने को सौभाग्यशाली समझता हूं
PM मोदी अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी के संपूर्णानंद संस्कृत विश्विद्यालय में भाजपा के बूथ विजय सम्मेलन में बूथ पदाधिकारियों को आज सम्बोधित किया। उन्हीने कहा कि बीजेपी कार्यकर्ता अपने स्वार्थ से ऊपर उठ कर देशहित में काम करते हैं। हम लोगों का दिल भी जीतते हैं। परिवारवादी लोगों ने सरकार चलाई उनके साथ गुंडागर्दी और माफियावाद जुड़ा हुआ है। शिवरात्रि आने वाली है और देश भर से श्रद्धालु काशी आएंगे। हमें काशी आने वाले हर एक श्रद्धालु की सेवा करनी है। काशी आने वाले श्रद्धालु बाबा के रूप होते हैं।

भाजपा कार्यकर्ता देश के लिए काम करते हैं, अपने स्वार्थ से ऊपर उठकर, इदं न मम् के भाव से काम करते हैं।

हम सभी के लिए हमेशा से ‘व्यक्ति से ऊपर दल, और दल से ऊपर देश’ रहा है।

हम चुनाव जीतते हैं लेकिन साथ ही लोगों का दिल भी जीतते हैं।

– पीएम @narendramodi pic.twitter.com/Z5TxqozRwY

— BJP (@BJP4India) February 27, 2022 PM मोदी ने कहा कि मैं किसी की व्यक्तिगत आलोचना करना पसंद नहीं करता और ना ही किसी की आलोचना करना चाहता हूं। लेकिन जब सार्वजनिक रूप से काशी में मेरी मृत्यु की कामना की गई, तो वाकई मुझे बहुत आनंद आया, मेरे मन को बहुत सुकून मिला। मुझे लगा कि मेरे घोर विरोधी भी ये देख रहे हैं कि काशी के लोगों का मुझ पर कितना स्नेह है। उन लोगों ने तो मेरे मन की मुराद पूरी कर दी। इसका मतलब ये कि मेरी मृत्यु तक ना काशी के लोग मुझे छोड़ेंगे और ना ही काशी मुझे छोड़ेगी। ये शहर मुक्ति के रास्ते खोलता है। देश के लिए गरीबी से मुक्ति के रास्ते खोलेगा, अपराध से मुक्ति के रास्ते खोलेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भोजपुरी में कहा कि “जैसे आप लोगन 2014, 2017 और 2019 में साथ देहला वैसे ही 2022 में आप सबके सहयोग मिली।” मोदी ने कहा कि इस सम्मेलन का हेतु आपने बूथ विजय सम्मेलन रखा है।

 

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प्रधानमंत्री ने कहा कि मुझ जैसे कार्यकर्ता को पार्टी ने बनारस भेजा। बनारस मुझे मिल गया और मैं बनारस का ही होकर रह गया। महादेव और मां गंगा के चरणों में बैठने के साथ काशी की सेवा का पुण्य लाभ पार्टी ने ही दिया है। उन्होंने कहा कि काशी में घाटों पर, मंदिरों पर बम विस्फोट होते थे। आतंकवादी बेखौफ थे, क्योंकि तब की समाजवादी सरकार उनके साथ थी। सरकार आतंकियों से खुलेआम मुकदमे वापस ले रही थी। लेकिन, काशी कोतवाल बाबा कालभैरव के आगे इनकी चलने वाली थी क्या? 

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